Sunday, August 10, 2014

जाति

ठाकुर साहब का लड़का और पंडित जी की लड़की दोनों जवान थे. दोनों में पहचान हुई. पहचान इतनी बढ़ी कि वे शादी के लिए तैयार हो गए.
जब प्रस्ताव उठा तो पंडित जी ने कहा - "ऐसा कभी हो सकता है ? ब्राह्मण की लड़की ठाकुर से शादी करे ! जाति चली जायेगी."
किसी ने उन्हें समझाया कि लड़का-लड़की बड़े हैं, पढ़े लिखे हैं, समझदार हैं. उन्हें शादी कर लेने दो. अगर उनकी शादी नहीं हुई तो भी वे चोरी-छिपे मिलेंगे और तब जो उन का सम्बन्ध होगा, वो व्यभिचार कहा जाएगा.
इस पर ठाकुर साहब और पंडित जी ने कहा - "होने दो. व्यभिचार से जाति नहीं जाती. शादी से जाती है."
--------- हरिशंकर परसाई जी.

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